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पता नहीं अब कब रोऊँगा अगली बार

Sunday, January 25, 2009

स्वाद चखा कल आँसू का जब बरसों बाद।
आया समन्दर का खारापन मुझको याद।।
दिल का दर्द पिघलकर बाहर आया था;
बहने दिया मैंने भी खुलकर बरसों बाद।

बहुत ज़रूरी है जीवन में रोना भी;
सीखा यारों मैंने जाकर ये बरसों बाद।
अश्कों ने धो डाला दिल के घावों को;
आज मिली कुछ राहत मुझको बरसों बाद।

वैसे तो रोना फितरत है हसीनों की;
सीख लो उनसे ये गर रहना है आबाद।
पता नहीं अब कब रोऊँगा अगली बार;
शायद बहेगा मन का नमक फिर बरसों बाद।

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जो पल बीते साथ तुम्हारे

Friday, January 23, 2009

रिश्ते टूटे बंधन टूटे सजने वाले दर्पण टूटे
सब कुछ तोड़ के बेशक जाना लेकिन पहले यह तो बताना
जो पल बीते साथ तुम्हारे उनसे पीछा कैसे छूटे

हॅस्ते हुए रहते थे हम, रोते हुए जीने लगे
खुशिया हुई मन से विदा, गम में तेरे मरने लगे

लोग करेंगे क्या क्या बातें, याद हैं सावन की बरसातें
जो पल भीगे साथ तुम्हारे, उनसे पीछा कैसे छूटे

कहती हैं शाम यह क्या हुआ नगमा कोई गाते नही
गुलशन ने भी पूछा मुझसे अब तुम दोनो आते नही

मुश्किल हैं कितना यह समझाना, टूटे दिल का दर्द छुपाना
जो पल महके साथ तुम्हारे उनकी खुश्बू कैसे छूटे

रिश्ते टूटे बंधन टूटे सजने वाले दर्पण टूटे

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हम को इस घर में जानता है कोई

Tuesday, January 20, 2009

दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई

आईना देख के तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई

पक गया है शजर पे फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई

फिर नजर में लहू के छींटे हैं
तुम को शायद मुघालता है कोई

देर से गूँजतें हैं सन्नाटे
जैसे हम को पुकारता है कोई

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सीख रहे हैंहँसना

Monday, September 15, 2008


सूरज पर प्रतिबंध अनेकोंऔर

भरोसा रातों परनयन हमारे सीख रहे हैंहँसना

झूठी बातों परहमने जीवन की चौसर परदाँव लगाए आँसू वालेकुछ

लोगो ने हर पल, हर दिनमौके देखे बदले पालेहम शंकित सच पा अपने,

वे मुग्ध स्वँय की घातों परनयन हमारे सीख रहे

हैंहँसना झूठी बातों परहम तक
लौट गई हैंमौसम की बेशर्म

कृपाएँहमने सेहरे के संग बाँधीअपनी सब मासूम खताएँहमने

कभी न रखा स्वयँ कोअवसर के अनुपातों परनयन हमारे सीख रहे हैंहँसना झूठी बातों पर

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चेहरे पर अरुणाई

Wednesday, September 3, 2008

जहाँ भी देखूँ तुम्हीं हो हर ओरप्रतीक्षा के पल, फिर कहाँ किस ओर ॥
चेहरे पर अरुणाई सी खिल जातीधड़कनें स्पन्दन बन मचल
जातीयादों की बारिश में, नाचे मन मोर ॥
कब तन्हा जब साथ तुम,
बन परछाईसाथ देख तुम्हारा खुदा भी मांगे मेरी
तन्हाईमेरे हर क्षण को सजाया, तुमने चित्त चोर ॥
मेरे संग चांद भी करता रहता
इंतज़ारतेरी हर बात को उससे कहा मैंने कितनी बारफिर
भी सुनता मुस्कुराकर,
जब तक न होती भोर ॥
तुम्हारे लिए हूँ मैं शायद,
बहुत दूरतुम पर पास मेरे,
जितना आँखों के नूरमेरी साँसों को बाँधे, तेरे स्नेह की डोर ॥

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कितना हसीन होता है

कितना हसीन होता है
नवह ख्वाब ,
जो कभी-कभीयूं ही आंखो मेंउतर के आता हैबीछा के
कागज़ परसितारों के हर्फ़और चाँद के किरणों कीरोशन स्याही कोनाम ख़त का दिया जाता है ,
पता लिखा होता हैइस में उस हद काजहाँ सब गुनाह माफ़ होते हैं ,......
जुड़ता है
रिश्ता सिर्फ़ रूह से रूह काऔर सूरज से चमकते आखरसिर्फ़ मोहब्बत की जुबान होते हैं ,
बहती सी यह हवाएँ ले जाती हैख्यालों को वहाँ तक ,जहाँ लफ्जों का ........
एक गुलिस्तां सा नज़र आता हैझर जाती है
राख याद कीऔर एक घुलता हुआ धुआँसब तरफ़ फैल जाता हैऔर
तब अटकी हुई साँसों के साथएक अन्तहीन सफर,जहाँ खत्म हुआ था .....
फ़िर वही से शुरू हो जाता है !!

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स्वाद चखा आँसू का

स्वाद चखा कल आँसू का जब बरसों बाद।
आया समन्दर का खारापन मुझको याद।।
दिल का दर्द पिघलकर बाहर आया था;बहने दिया मैंने भी खुलकर बरसों बाद।
बहुत ज़रूरी है जीवन में रोना भी;सीखा यारों मैंने जाकर ये बरसों बाद।
अश्कों ने धो डाला दिल के घावों को;आज मिली कुछ राहत मुझको बरसों बाद।
वैसे तो रोना फितरत है हसीनों की;सीख लो उनसे ये गर रहना है आबाद।
पता नहीं अब कब रोऊँगा अगली बार;शायद बहेगा मन का नमक फिर बरसों बाद।

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सहज स्वीकार करो

ना कभी अपने धीर का प्रतिकार करोहो निडर संघर्ष को,
सहज स्वीकार करो पथ कंटक बड़ा,
सैकड़ों हैं झँझावातकरने को स्वागत खड़े,
जाने कितने ही आघातपर लक्ष्य से ना अडिग हो,
निडर डटे रहोहिम्मत हो अगर तो,
है काँटों की क्या बिसात पंख लगा लो उमंग का,
उत्साह का संचार करोहो निडर संघर्ष को,
सहज स्वीकार करोरहे लगन,
संकल्प पक्का, हौसला खोने ना पाएना देखो उस ओर तुम, हैं
जहाँ मायूसियों के साएबना के साधना इस जीवन को,
मानव हित मेंकरो सूर्योदय जहाँ ग़म के,
बादल हैं छायेबना हृदय अपना विशाल,
आशा का विस्तार करोहो निडर संघर्ष को,
सहज स्वीकार करो. हो सृष्टि के सबसे प्रखर प्राणी,
तुम इंसान होपहचानो तो स्वयं को,
क्षमताओं की ख़ान होउठाओ आनंद प्रकृति के आतिथ्य का,
ना भूलोकि तुम इस संसार में, आए बन के मेहमान होहो हो के हताश,
ना इस जीवन को बेकार करोहो निडर संघर्ष को, सहज स्वीकार करो

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इंतज़ार

Monday, July 14, 2008

मत इंतज़ार कराओ हमे इतनाकि वक़्त के फैसले पर अफ़सोस हो जायेक्या पता कल तुम लौटकर आओऔर हम खामोश हो जाएँदूरियों से फर्क पड़ता नहींबात तो दिलों कि नज़दीकियों से होती हैदोस्ती तो कुछ आप जैसो से हैवरना मुलाकात तो जाने कितनों से होती हैदिल से खेलना हमे आता नहींइसलिये इश्क की बाजी हम हार गएशायद मेरी जिन्दगी से बहुत प्यार था उन्हेंइसलिये मुझे जिंदा ही मार गएमना लूँगा आपको रुठकर तो देखो,जोड़ लूँगा आपको टूटकर तो देखो।नादाँ हूँ पर इतना भी नहीं ,थाम लूँगा आपको छूट कर तो देखो।लोग मोहब्बत को खुदा का नाम देते है,कोई करता है तो इल्जाम देते है।कहते है पत्थर दिल रोया नही करते,और पत्थर के रोने को झरने का नाम देते है।

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आँखों मे मोहब्बत का सितारा

किसी की आँखों मे मोहब्बत का सितारा होगाएक दिन आएगा कि कोई शक्स हमारा होगाकोई जहाँ मेरे लिए मोती भरी सीपियाँ चुनता होगावो किसी और दुनिया का किनारा होगाकाम मुश्किल है मगर जीत ही लूगाँ किसी दिल कोमेरे खुदा का अगर ज़रा भी सहारा होगाकिसी के होने पर मेरी साँसे चलेगींकोई तो होगा जिसके बिना ना मेरा गुज़ारा होगादेखो ये अचानक ऊजाला हो चला,दिल कहता है कि शायद किसी ने धीमे से मेरा नाम पुकारा होगाऔर यहाँ देखो पानी मे चलता एक अन्जान साया,शायद किसी ने दूसरे किनारे पर अपना पैर उतारा होगाकौन रो रहा है रात के सन्नाटे मेशायद मेरे जैसा तन्हाई का कोई मारा होगाअब तो बस उसी किसी एक का इन्तज़ार है,किसी और का ख्याल ना दिल को ग़वारा होगाऐ ज़िन्दगी! अब के ना शामिल करना मेरा नामग़र ये खेल ही दोबारा होगा

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सारा प्यार

Sunday, July 13, 2008


क्या लिखून्कुछ जीत लिखू या हार लिखूँया दिल का सारा प्यार लिखूँकुछ अपनो के ज़ाज़बात लिखू या सापनो की सौगात लिखूँमै खिलता सुरज आज लिखू या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँवो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की सान्स लिखूँवो पल मे बीते साल लिखू या सादियो लम्बी रात लिखूँमै तुमको अपने पास लिखू या दूरी का ऐहसास लिखूँमै अन्धे के दिन मै झाँकू या आँन्खो की मै रात लिखूँमीरा की पायल को सुन लुँ या गौतम की मुस्कान लिखूँबचपन मे बच्चौ से खेलूँ या जीवन की ढलती शाम लिखूँसागर सा गहरा हो जाॐ या अम्बर का विस्तार लिखूँवो पहली -पाहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँसावन कि बारिश मेँ भीगूँ या आन्खो की मै बरसात लिखूँ गीता का अॅजुन हो जाॐ या लकां रावन राम लिखूँमै हिन्दू मुस्लिम हो जाॐ या बेबस ईन्सान लिखूँमै ऎक ही मजहब को जी लुँया मजहब की आन्खे चार लिखूँकुछ जीत लिखू या हार लिखूँया दिल का सारा प्यार लिखूँ

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